नटखट बन्दर (Natkhat Bander) - Short Moral Hindi Panchtantra Story.

Natkhat bander - New Hindi Panchtantra Story. This is short moral story for class 1c class 2 and class 3. This is motivational short story in hindi among the best top 10 moral stories in hindi for kids.

नटखट बन्दर 


एक बार की बात है, एक जंगल में एक बंदर रहता था। वह जंगल में रहने वाले हर जानवर को परेशान करता था। वह किसी का दोस्त नहीं था और हमेशा किसी न किसी कारण से सभी जानवरों से झगड़ता रहता था। अन्य सभी जानवर उससे तंग आ चुके थे।

जब भी जंगल में किसी जानवर को चोट लगती तो बंदर पहले तो उनके प्रति दया दिखाता और औषधीयो  की पेशकश करता परन्तु इसके पीछे उनका असली मकसद मदद करना नहीं बल्कि उनके दुःखो को और ज्यादा बढाकर मजे लेना था क्योंकि जड़ी-बूटी के मिश्रण में निम्बू और काली-मिर्च  मिली होती थी जो जब घाव पर लगता था तो और भी ज्यादा दर्द करता था।

एक दिन एक खरगोश का पैर पत्थर से टकराया और वह चोटिल हो गया। खरगोश दर्द से रो रहा था। उसी समय बंदर वहां से गुजर रहा था। उसने देखा कि खरगोश बुरी तरह से आहत है, तभी उसे कुछ मस्ती करने की सोची। वह खरगोश के पास गया और उससे पूछा कि उसे चोट कैसे लगी? खरगोश ने जवाब दिया कि वह वहां खेल रहा है तो उसका  पैर पत्थर से टकरा और चोट लग गई। बंदर घाव पर अपनी करुणा दिखाता है और उसे दवा देकर चला गया था।

बंदर खरगोश को औषधी  देने के बाद चला गया। वह खरगोश को दर्द में देखने के लिए पेड़ के पीछे छिप जाता है । खरगोश जैसे ही उस औषधि को अपने घाव पे लगता है उसका दर्द और भी तेज हो जाता है और वो दर्द से चिल्लाने लगता है। यह सब देखकर बंदर खूब हसता है और वह से चला जाता है। 

खरगोश के रोने की आवाज़ सुन सारे जानवर उसके पास जाते है और पूछते है कि वो क्यों रप रहा है ? खरगोश उन्हें साड़ी बात बताता है। खरगोश की बाते सुनकर सारे जानवर बंदर पर बहुत गुस्सा होते है और उसे सबक सीखने का फैसला करते है। 

अचानक खरगोश को बंदर को सबक सीखने की  एक तरकीब सूझता है। वो दो थैला लेता है जिसमे से एक दूसरे से बड़ा रहता है। बड़े। वाले थैले के निचे वो लासा लगा देता है जिससे वो जमीं में रखने पर चिपक जाए। खरगोश दोनों थैला लेकर बंदर के पास जाकर पूछता है कि क्या तुम्हे मीठे-मीठे रसीले आम खाने है। बंदर कहता है, हाँ !हाँ ! मुझे आम बहुत पसंद है मै जरूर खाऊंगा। 

यह सुनकर खरगोश ने बोला तब तो हमे सामने वाले पहाड़ी पे चलना चाहिये, वहाँ एक पेड़ है जिसमे बहुत मीठे आम फलते है। यह कहकर खरगोश बंदर के सामने दोनों थैला बढ़ा देता है और बन्दर तुरंत बड़ा वाला झोला ले लेता है। खरगोश भी यही चाहता था। अब दोनों पहाड़ी के तरफ चल देते है। 

पहाड़ी पे पहुचने के बाद बंदर तुरंत झोला जमीन पर रख आम के पेड़ पर छलांग लगा देता है  और झोले में आम इकट्ठा करने लगता है। जब झोला आम से पूरी तरह भर जाता है तो वो पेड़ पर से उतरकर झोला उठता है पर झोले में लासा लगा होने के कारन झोला जमीं में चिपक जाता है। 

बंदर अपने पुरे ताकत से झोला खींचता है परन्तु झोला तो नहीं उठ पता उल्टा इसी क्रम में उसके हाथ छिला जाते है। खरगोश ने उसके घाव पर करुणा दिखाया और उसे वही ओषधि दी जो बंदर ने उसे दिया था। बंदर जैसे ही उसे अपने घाव पर लगाता है उसका दर्द और भी बढ़ जाता है। दर्द में चिल्लाता हुआ बन्दर नदी के तरफ दौड़ा और अपने हाथो को पानी में डूबा लिया फिर भी उसका दर्द कम ना हुआ। अब बन्दर को समझ आ गया था की जब वो यही ओषधि दुसरो को उनके घाव पे लगाने के लिया देता था तो उन्हें कितना दर्द होता होगा। उसने अपना सबक सीखा है कि आप दूसरों के साथ जो भी करते हैं वह आपके पास वापस आता है।

शिक्षा :
 हमें हमेशा दूसरों के लिए अच्छा बनने की कोशिश करनी चाहिए।

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