Short Hindi Story On Diwali - Raju Ki Diwali (राजू की दिवाली )

Hindi Story On Diwali : 

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RAJU KI DIWALI

(Hindi Story On Diwali)

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आज छोटी दिवाली का दिन था पर राजू सवेरे से ही उदास था। उसके घर में घी तो क्या दीपक खरीदने के भी पैसे नहीं थे। इसी चिंता में राजू घर से सोचता-सोचता निकल पड़ा। 

हलाद हमेसा से ही ऐसे नहीं थे। पांच साल पहले उसके पिता का देहांत हो गया था। उस समय राजू करीब 6 साल का था। तभी से उसके घर की स्थिति बिगड़ गई थी। उसके पिताजी सेठ धनिराम के गोदाम में मजदूरी किया करते थे। 

एक दिन वह सड़क दुर्घटना में चल बसे। अब माँ घर-घर बर्तन माज़ कर उसका और अपना पेट भरती थी। माँ को कुछ दिनों से बुखार आ रहा था इसलिए वो काम पर नहीं जा पा रही थी। घर में रखे थोड़े से पैसे भी ख़त्म हो चुके थे इसलिए राजू सोच रहा था कि दीपावली इस बार नहीं मन पाएगी तभी अचानक गाड़ी के हॉर्न की आवाज़ आई और उसका ध्यान टुटा। उसने देखा कि वो चलते-चलते घर से काफी दूर निकल आया है। उसने चारो ओर देखा और पाया कि वो शहर के सबसे धनि इलाके में आ गया है। 

शाम ढल चुकी थी। चारो तरफ रंग बिरंगी रोशनी फैली थी। उसने देखा कि सभी घरो में खुब चहल-पहल है पर एक आलीशान घर सजावट के बाद भी काफी सुनसान पारा है। वह उधर ही चल दिया। वहाँ पहुंचकर उसने घर के चौकीदार से पूछा, "चाचा ! यहाँ सब तरफ सन्नाटा क्यों है ?" चौकीदार ने बताया, "घर की मालकिन को गुजरे एक साल हो गया है तभी से उनकी 9 साल की बेटी बहुत उदास रहती है। साहब सदा काम में व्यस्त रहते है और घर में वो छोटी बच्ची अकेली रहती है।

राजू ने देखा कि उस घर की खिड़की में एक सुन्दर लड़की बैठी रो रही है।  वह खिड़की के निचे गया और उससे रोने का कारन पूछा ? लड़की कुछ नहीं बोली तब राजू ने कहा, तुम्हारे पास सब कुछ है फिरभी तुम रो रही हो, मेरे पास ना कपड़े है ना खाना और ना दिवाली मनाने के लिए पैसे फिरभी मैं कभी नहीं रोता। 

राजू की बात सुनकर लड़की चुप हो गई। उसने चौकीदार को आवाज़ देकर राजू को अंदर लाने को कहा। लड़की ने उससे उसका नाम पूछा और अपना नाम रानी बताया। राजू और रानी बाते करने लगे फिर वो खिलोनो से खेलने लगे। राजू के चुटकुलों व मजाक भरी बातो से रानी हॅसने लगी। 

घर के सभी नौकर रानी को हस्ते-खेलते देखकर हैरान थे। राजू और रानी खेल में इतने मगन थे कि उन्हें पता ही ना चला कि कब रानी के पिताजी कमरे में आई और कब चुप-चाप खरे होकर दोनों को ध्यान से देखने लगे। जैसे ही उन दोनों की नजर पिताजी पर पारी तो रानी खुसी से हसते हुए पिता के गले लग गई पर राजू सहम सा गया। 

वह डर रहा था कि रानी के पिता उसे घर के अंदर देख कर डाटेंगे पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। जब रानी के पिता ने राजू की आप बीती सुनी  उन्होंने मन ही मन कुछ फैसला किया और अपने ड्राइवर के साथ राजू को भेज कर उसकी बीमार माँ को भी बुलवा लिया। 

फिर घर के आंगन में बना एक कमरा दोनों को रहने के लिए दिया और कहा, आज से आप लोग यही रहेंगे। राजू की माँ रानी और घर की देख-भाल करेगी। उन्होंने राजू का दाखिला भी एक स्कूल में करने का फैसला किया। दूसरे दिन राजू ने रानी के साथ मिलकर दिवाली खूब धूम-धाम से मनाई। दिवाली का त्यौहार सब के जीवन में खुशिया ले आया था। 

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